सावन का महीना आते ही शिव भक्तो मे नया जोश ओर उमंग उठने लगती है ओर अपने छेत्र से बड़ी संख्या मे कावड यात्रा पर निकल पड़ते है। इनका पहला पड़ाव होता है हरिद्वार जंहा हरकी पोड़ी पर स्नान करके ये आगे ऋषीकेश पहुचते है, ऋषीकेश मे स्वर्गाश्रम से शुरु होती है नीलकंठ महादेव की यात्रा। इस यात्रा मे पश्चिमी उत्तर प्रदेश ,हरियाणा,राजस्थान ओर पंजाब से लाखो की संख्या मे श्रद्धालु नीलकंठ महादेव पर जल चडाने आते है ओर भगवान् शिव इनकी मन्नतो को पूर कर देते है। मान्यता है कि उत्तराखंड के कण-कण मे भगवान शिव का वास है हिमालय शिव परिवार का वास स्थान है यहाँ की यात्रा ओर यहाँ के दर्शन मात्र से भक्तो के सभी दुःख दूर हो जाते है,पुराणो में कहा की सबसे पहले कावड़ भगवान परशुराम ने उठाई ,आज उस परम्परा को शिवभक्त निर्बाध रूप से चला रहे है। वेद पुराणो में मान्यता है कि सावन के महीने मे शिव परिवार की आराधना की जाती है चतुर्थ मास के इन चार महीनो मे शिव परिवार पर ही पूरी सृष्टी को चलाने का भार रहता है यही कारण है सावन के महीने मे भगवान् शिव की पूजा की जाती है और शिवालयों पर जल चढाने ने भगवान शिव प्रसन्न होते है। मेरा नाम राहुल नेगी है , मेरा ब्लॉग जिसका नाम "संवाद.. LETS TALK" है, एक ऐसा मंच है जहाँ में खुद की सोच और जज्बात को बयां करता हूँ -- अपने आस-पास घट रही घटनायों को लेख के माध्यम से दिखाना मुझे पसंद है।
Sunday, 24 July 2016
कण-कण मे भगवान शिव
सावन का महीना आते ही शिव भक्तो मे नया जोश ओर उमंग उठने लगती है ओर अपने छेत्र से बड़ी संख्या मे कावड यात्रा पर निकल पड़ते है। इनका पहला पड़ाव होता है हरिद्वार जंहा हरकी पोड़ी पर स्नान करके ये आगे ऋषीकेश पहुचते है, ऋषीकेश मे स्वर्गाश्रम से शुरु होती है नीलकंठ महादेव की यात्रा। इस यात्रा मे पश्चिमी उत्तर प्रदेश ,हरियाणा,राजस्थान ओर पंजाब से लाखो की संख्या मे श्रद्धालु नीलकंठ महादेव पर जल चडाने आते है ओर भगवान् शिव इनकी मन्नतो को पूर कर देते है। मान्यता है कि उत्तराखंड के कण-कण मे भगवान शिव का वास है हिमालय शिव परिवार का वास स्थान है यहाँ की यात्रा ओर यहाँ के दर्शन मात्र से भक्तो के सभी दुःख दूर हो जाते है,पुराणो में कहा की सबसे पहले कावड़ भगवान परशुराम ने उठाई ,आज उस परम्परा को शिवभक्त निर्बाध रूप से चला रहे है। वेद पुराणो में मान्यता है कि सावन के महीने मे शिव परिवार की आराधना की जाती है चतुर्थ मास के इन चार महीनो मे शिव परिवार पर ही पूरी सृष्टी को चलाने का भार रहता है यही कारण है सावन के महीने मे भगवान् शिव की पूजा की जाती है और शिवालयों पर जल चढाने ने भगवान शिव प्रसन्न होते है।
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